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सोमवार, 31 जनवरी 2011

तू जिंदा है तो ज़िन्दगी की जीत पर यकीन कर

तू जिंदा है तो ज़िन्दगी की जीत पर यकीन कर 
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर 

ये गम के और चार दिन, सितम के और चार दिन 
ये दिन भी जायेंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन 
कभी तो होगी इस चमन पे भी बहार की नज़र 
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर 

बुरी है आग पेट की बुरे हैं दिल के दाग ये 
न दब सकेंगे एक दिन बनेंगे इन्कलाब ये 
मुसीबतों के सर कुचल चलेंगे एक साथ हम 
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
जमीं के पेट में पले अगन पले हैं जलजले 
टिके न टिक सकेंगे भूख रोग के स्वराज ये
गिरेंगे ज़ुल्म के महल बनेंगे फिर नवीन घर 
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर 
हज़ार भेष धर के आई मौत तेरे द्वार पर 
मगर तुझे न छल सकी चली गयी वो हारकर 
नयी सुबह के संग सदा तुझे मिली नयी उमर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर 

हमारे कारवां को मंजिलों का इंतजार है 
ये बिजलियों ये आँधियों की पीठ पर सवार हैं 
तू आ कदम मिला के चल चलेंगे एक साथ हम
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
सुबह ओ शाम के रंगे हुए गगन को चूमकर 
तू सुन ज़मीन गा रही है कबसे झूम झूमकर 
तू आ मेरा श्रंगार कर तू आ मुझे हसीं कर 
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

शनिवार, 29 जनवरी 2011

हम होंगे कामयाब एक दिन


होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

पूंजीवाद का होगा नाश
पूंजीवाद का होगा नाश एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

सामंतवाद का होगा नाश
सामंतवाद का होगा नाश एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

साम्राज्यवाद का होगा नाश
साम्राज्यवाद का होगा नाश एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

जीतेंगे मजदुर जीतेंगे किसान
जीतेंगे नौजवान एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

होगी क्रांति चारों ओर
होगी शांति चारों ओर एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

हम चलेंगे साथ साथ, डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ साथ एक दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

नहीं डर किसी का आज, नहीं डर किसी का आज
नहीं डर किसी का आज के दिन
हो-हो... मन में है विश्वास, पुरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

from.....
http://inquilab.tripod.com/

बुधवार, 26 जनवरी 2011

आग चूल्हे से उठी है आज उत्तराखंड की..


आग चूल्हे से उठी है आज उत्तराखंड की...

धुंध अब होकर रहेगी साफ उत्तराखंड की...


इन धधकती चोटियोँ की एक लंबी है व्यथा...

पीर कितने सह रहे हैँ क्या किसी को है पता...

इसके आँगन मेँ चलाई जिसने गोली हारकर...

उसके मुँह पर तू तमाचा मारकर सबको बता...

आँच महलोँ तक गई है आज उत्तराखंड की...

धुंध अब होकर रहेगी साफ उत्तराखंड की...


देश की खातिर मरे और देश की खातिर जिए...

सुमन और गढ़वाली जैसे देश को हमने दिए...

हथियार हाथोँ मेँ उठाने का यही है वक्त अब...

भूखे प्यासे रोते बिलखते नौनिहालोँ के लिए...

हो गई है धार पैनी आज उत्तराखंड की...

धुंध अब होकर रहेगी साफ उत्तराखंड की...


ठीक करले आज तू अपने बहीखाते हिसाब...

हमको सीधे चाहिए अपने सवालोँ के जवाब...

मुट्ठियाँ ताने सड़क पे निकले हक़ के वास्ते...

क्रांतिवीरोँ को पढ़ा मत तू दलाली की किताब...

सूर्य निकला कट गई है रात उत्तराखंड की...

धुंध अब होकर रहेगी साफ उत्तराखंड की...!
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(चंदन सिँह नेगी)
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