बुधवार, 25 अप्रैल 2012

दो घंटे में ही दिमाग का दही बन गया


एंकर बोली इस चैनल में सच ज्यादा है.
कहीं न जाना खबर दिखाने का वादा है.

एक खबर पर दो घंटे का हल्ला काटा,
बोली फिर विज्ञापन की थोड़ी बाधा है.

पांच मिनट में लौट के आई, बैठे रहना.
अब तक जो तुमने देखा वो सच आधा है.

दो घंटे में ही दिमाग का दही बन गया,
मट्ठा बनाके छोड़ेंगे, ये आमादा है.

अब भी टीवी से चिपका है, क्या गुलाम है,
किसने कहा देख "बूँद" किसने लादा है?
..........................

(विक्रम नेगी "बूँद")
०७ अप्रैल २०१२
दोपहर १२:४५

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