सोमवार, 22 अप्रैल 2013

रूसी कवि सेर्गेई येस्येनिन की एक कविता की पंक्तियों का कुमाउनी और गढ़वाली में अनुवाद.

रूसी कवि सेर्गेई येस्येनिन की एक कविता
की पंक्तियों का कुमाउनी और गढ़वाली में अनुवाद.
-------------------------------------------
हिंदी अनुवाद :
--------------
कवि होना ऐसा है
जैसे जीवन के प्रति निष्ठा रखना
हर मुश्किल में
मानो खुद अपनी उधेड़कर कोमल चमड़ी
देना लहू उड़ेल
अन्य लोगों के दिल में....!

------------------------
कुमाउनी अनुवाद :
------------------
कवि हूण यस छु
जशि जीवने लिजि बिस्वास धरण
हर आफत में
मानो आपु हातल उधड़ीभेर आपणि मुलैम चमड़ि
तौहड्ये दीण ल्यो
दूसाराक हिय में....!

(कुमाउनी अनुवाद- विक्रम नेगी बूंद)

--------------------------
 
गढ़वाली में अनुवाद
---------------------

कवि होण यन च
जन जीण का परति विस्वात रखण
हरेक मुस्किल मा
माना अफ्वी अपडि़ कुंगळि चमडि़ उधेड़ी
देण ल्वे खौति
हौरि लोखूं का हिया मा......
(गढ़वाली अनुवाद- धनेश कोठारी)

Note- मूल कविता रुसी भाषा में है, अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध नहीं है, हिंदी अनुवाद "लहू है कि तब भी गाता है "पाश" (संपादक चमन लाल जी) की भूमिका में पढ़ने को मिला.

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...