सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

पिछड़ेपन की कसक भी है पहाड़....!

राग यमन कल्याण की उठती-गिरती सरगम,
लहराती बर्फीली हवाओं की सरगोशी,
उबड़-खाबड़ सड़कों के गड्ढे,
थकान और सुकून की अनुभूति,
अथक जीविका की जिजीविषा,
हताशा-निराशा और जीवन की जटिलताओं से सामंजस्य,
उम्मीदों और टूटते ख़्वाबों का तिलिस्म ही नहीं,
बल्कि सबसे अधिक ऊंचाई पर होने के गौरव के साथ-साथ
पिछड़ेपन की कसक भी है पहाड़....!

...
"बूँद"

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